ब्रेकिंग

आखिर कौन धोएगा"हत्यारा पुलिस,के वर्दी पर लगा खून का धब्बा" ?

आखिर कौन धोएगा"हत्यारा पुलिस,के वर्दी पर लगा खून का धब्बा" ?

By : संवाददाता: बिनोद कुमार झा
Jul 02, 2018
444

जी हाँ हम बात कर रहे हैं उसी भदोही जिले के गोपीगंज नगर थाने की,जहां मृतक रामजी ऑटोचालन कर अपना परिवार का जैसे तैसे गुजारा करता था। पुलिस के हिरासत में हुई पीट पीट कर रामजी मिश्र की ह्त्या। इस ह्त्या में,और ह्त्या के सबुत को जमींदोज कर गहराता जा रहा है पुलिस के वर्दी पर लगा खून का यह धब्बा। अब मृतक रामजी मिश्र की परिवार की माने तो उनका कहना साफ़ है ये पुलिसवाले ने ही पिट पीटकर मारडाला है मेरे राम को ।

"हत्यारा आरोपी पुलिस सुनील वर्मा" के ऊपर ताजिराते हिन्द की धारा २६६/१८,३०२ के तहत मुक़द्ध्मा पंजीकृत कर पहले ही लाइन हाजिर किया जा चुका है। वहीँ अब कस्बा चौकी इंचार्ज एसआई अखिलेश्वर सिघ यादव को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है। अब हम थोड़ी देर को यह भी मान लें की पुलिस गुनहगार नहीं है,तो उसपर उठ रहा है कई अहम् सवाल मुंह खोले यूँ ही खड़ा है जिसका जवाब तो देना होगा जनता को। 

आखिर कौन धोएगा"हत्यारा पुलिस,के वर्दी पर लगा खून का धब्बा" ?

 पहला सवाल- जब पीड़ित दोनों भाई थाने में मामले को निपटाने के लिए पुलिस के पास रिपोर्ट आया, तो पुलिस द्वारा FIR दर्ज क्यों नहीं की गई ? 

दूसरा सवाल- किस विनाह पर पुलिस द्वारा मार पीट कर हिरासत में बंद किया गया ?

तीसरा सवाल- क्यों सिर्फ मृतक रामजी को ही पुलिस हिरासत में लेने के बाद परिजनों को हिरासत में बंद करने की धमकी देकर थाना परिसर से भगाया गया ? 

चौथा सवाल- रामजी की तबियत बिगड़ने लगी तो क्यों नहीं उसके परिजनों को बुलाया गया ?

पांचवां सवाल - हत्यारा पुलिस सुनील वर्मा क्यों उसके घर जाकर ७५,००० रुपये देने की पेशकश की ?

छठा और अहम् सवाल- क्यों आरोपी "हत्यारा पुलिस सुनील वर्मा" को मृतक रामजी मिश्र के पार्थिव शरीर को दाहसंस्कार करवाने की जल्दी पड़ी थी ? और ऐसे तमाम सवालात है जो मृतक रामजी की खून का धब्बा पुलिस के वर्दी पर जा चिपका है,जो की ना ही तो यह वर्दी पर लगा खून का धब्बा अब कोई डिटर्जेंट वाशिंग पाउडर धो सकता है,और ना ही कोई टिकिया,

आखिर कौन धोएगा"हत्यारा पुलिस,के वर्दी पर लगा खून का धब्बा" ?

अब पुलिस के पास अब भी दो अहम् रास्ता है जिसे हुकम का इक्का कहते हैं वो है पोस्टमार्टम  रिपोर्ट को अपने पक्ष में करवाना वो भी अख्तियार कर लिया गया। अब बचा है मजिस्ट्रेट जांच अब इसमें देखना यह अहम् होगा की इस जांच की दिशा को किस दशा के लिए अख्तियार किया जाता है ?

पुलिस के वर्दी पर लगी खून के छींटे धोकर,दागी हत्यारा पुलिस सुनील वर्मा को बाइज्जत वरी करता है। अथवा मजलूम बेसहारा परिवार के साथ न्यायोचित तर्कसंगत रुख अख्तियार कर बिखरते मिश्र परिवार को न्याय देकर कानून और संविधान का गौरव का फतह लहराता है। 

आखिर कौन धोएगा"हत्यारा पुलिस,के वर्दी पर लगा खून का धब्बा" ?

आज की तारीख गवाह है जिसके घर में एक बेटियां हो वह भी भयातुर और सदैव शशंकित रहते हैं. aur यहां तो मृतक रामजी मिश्र के परिवार में तीन तीन बेटियां है एवं सबसे छोटा बेटा जिसे अभी अभी अपना भी होश नहीं। पढ़ने लिखने का उम्र था छीन लिया बाप का सहारा अब कौन देखेगा उन माँसुमों की जिंदगी ?

प्रदेश सरकार ने उसपर मरहम खरीदकर छिड़कने के लिए कर दिया गया २-२ लाख का ऐलान, ये क्या उसे कफनदान के लिए दिया जा रहा है या परिवार चलाने के लिए आर्थिक सहयोग ? सरकार को उसके परिवार का दायित्व लेना होगा बेटियों की शादी और बेटे को जबतक बालिग ना हो जाए उसके पढ़ाई का खर्चा व् किसी विभाग में तय करनी होगी सरकारी नौकरी। 
 उन परिवार का सहारा प्रशासन के नाम पर अंग्रेजी हुकुमत चलाने वाले एक कसबे व् क्षेत्र के न्यायमुखी जब अन्याय का रास्ता अख्तियार करे तो न्याय की फ़रियाद आखिर जनता कहाँ करे। 



Tags:
leave a comment



आज का पोल