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इफी 2018 में गैर-फीचर फिल्मों के निर्देशकों ने प्रेस से मुलाकात की

इफी 2018 में गैर-फीचर फिल्मों के निर्देशकों ने प्रेस से मुलाकात की

By : Binod Jha
Nov 28, 2018
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गोवा में हो रहे 49वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के गैर-फीचर फिल्म वर्ग में दिखाई गई फिल्म 'द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर' के डायरेक्टर और जाने-माने सिनेमैटोग्राफर श्री एस. नल्ला मुथु ने कहा कि एक ऐसे देश में जहां मुश्किल से ही कोई पर्यावरण से जुड़े विषयों वाली फिल्मों पर निवेश करता है, वहां गुणवत्ता भरी फिल्में निर्मित करने के लिए खुद धन जुटाना सबसे श्रेष्ठ विकल्प है। वे'मॉनिटर', 'मिडनाइट रन' और 'ना बोले वो हराम' जैसी गैर-फीचर श्रेणी की फिल्मों के निर्देशकों के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
 

इफी 2018 में गैर-फीचर फिल्मों के निर्देशकों ने प्रेस से मुलाकात की

अपनी फिल्म 'द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर' के बारे में बात करते हुए श्री नल्ला मुथु ने कहा कि ये फिल्म संरक्षणवादियों, जीवविज्ञानियों या वन्यजीवों के बारे में जानने वाले लोगों के लिए नहीं है। ये फिल्म आम दर्शकों के लिए बनाई गई है और जानवरों का चित्रण करते और उन्हें मानवीय बनाते हुए इसकी कहानी भारतीय परिपेक्ष्य से कही गई है। उन्होंने इशारा किया कि चूंकि भारत में पर्यावरण विषयक परियोजनाओं के लिए कोई समर्पित चैनल या कोई चैनल स्लॉट नहीं है, ऐसे में हमें नेशनल जियोग्राफिक और डिस्कवरी जैसे चैनलों पर निर्भर रहना पड़ता है जहां गुणवत्ता भरे उत्पाद की मांग रहती है। 'द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर' दरअसल रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की दिग्गज शेरनी मछली के दृढ़ निश्चय, साहस और आत्मविश्वास को दिखाती है। मानव-पशु संघर्ष पर एक सवाल का जवाब देते हुए श्री मुथु ने कहा कि आगे बढ़ना है तो सह-अस्तित्व ही एकमात्र विकल्प है।



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