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बेरोजगारी की धधकते ज्वाला की दंश झेलती देश की आमोंखास जनता

बेरोजगारी की धधकते ज्वाला की दंश झेलती देश की आमोंखास जनता

By : Binod Jha
Sep 02, 2019
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आपको बता दें की उत्तर प्रदेश स्थित जिला गौतमबुद्ध नगर के शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए नॉएडा प्राधिकरण द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए वर्क सर्किल-9 के परियोजना अभियंता को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। गत कई दिनों से अभियान को सफल बनाने के लिए प्राधिकरण में रणनीति तैयार की जा रही थी। आज पहली कार्यवाही की गई। इस मौके पर सेक्टर-18, 150 के अलावा आसपास की सड़कों पर बने खोखे, रेहड़ी पटरी के अलावा फूड वैन को हटाया गया। उन्हें जब्त किया गया। साथ ही जुर्माना लगाया गया। अतिक्रमण हटाने के बाद पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है कि यहां दोबारा अतिक्रमण न हो सके। इसकी एक रिपोर्ट तैयार की गई। जिसे आला अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। वर्क सर्किल-9 के परियोजना अभियंता ने बताया कि सड़कों पर अतिक्रमण बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभियान निरंतर जारी रहेगा। जिससे सड़कों को जाम मुक्त किया जा सके।

बेरोजगारी की धधकते ज्वाला की दंश झेलती देश की आमोंखास जनता

 अब आप समझ सकते हैं की अतिक्रमण मुक्त के नाम पर किस तरह गरीबों का शोषण किया जा रहा है। क्योंकि गरीब तो इस आलिशान fortuner कार में सवार होकर चलेगी नहीं, तो अमीर घरानों के लिए ये मसौदा तैयार किया गया है। अमीरों के लिए रास्ता साफ़ करने की ये साड़ी कवायद चल रही है। 
यहाँ तो रोजगार से बेरोजगारी की तरफ देश की दिशा तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। देश के भाजपा सरकार की यह कुव्यवस्था का परिणाम है, आपको बता दें गौतमबुद्ध नगर जिले में लगभग बीते 23 दिनों के दरमियान में 9000 से अधिक फुटपाथ (रेहरी-पटरी) पर नीजि रोजगार चला कर,कर रहे गुजर बसर करने वालों का यकायक रोजगार बंद करा देना उनके साथ घोर अत्याचार है।

जी हाँ, जिस टी-स्टॉल की कार्य से उबर चुके हमारे देश के सरकार माननिय प्रधानमंत्री मोदी जी आज देश की जिम्मेदारी सम्भाल रहे हैं । आज पुनः यह उन्हीं चाय-पान वालों की पुकार और करुण क्रंदन है जो आज अपने दुकान लगवाने के लिए अपने प्रदेश सरकार से दुहाई कर रहे हैं की हमें भी अपने परिवार-बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाकर जीने के अधिकार से विमुख ना करें। 
 

बेरोजगारी की धधकते ज्वाला की दंश झेलती देश की आमोंखास जनता

अगर आप नौकरी दिलाने व रोजगार कराने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करा सकते, तो ये विफलता सरकार की है, निश्चित तौर पर आपकी है। ईस तरह से ईन्हें रोजगार बंद कराने का भी कोई औचित्य नहीं। आज कई परिवार के बच्चे(छात्र/छात्राऐं) स्कुली फीस तक देने को मोहताज हो रहे हैं,कइयों के परिजनों का ईलाज हस्पताल में चल रहा है जिसकी वो बिल का भुगतान तक नहीं कर पा रहे हैं । और तो और यहाँ तक के रोज की कमाई से घर में चूल्हा जलता था आज खाना-खाने को भी मोहताज हो रहे हैं बच्चे । क्या करेगा माँ और बाप, कैसे पालेगा बच्चे ?

सरकार के बडे़-बडे़ दावे, "बेटी बचाओ,बेटी पढाओ" -"शिक्षित करो,शिक्षा अपनाओ" समेत रोजगार व नौकरी देने जैसी तमाम दावे धुंधली व खोखली नजर आनें लगे हैं । हाल ही बताया जा रहा है कि मारुती कंपनी ने भी 10,00,000 लोगों को नौकरी से निकाला है । ईसके अलावा जहाँ पहले से ही देश में लाखों शिक्षित युवक युवतियाँ बेरोजगारी कि दंश झेल रहे हैं वहीं नीजि रोजगार कर अपने परिवार का भरन पोषण करने वालों को रोजगार से विमुख करना यह कतई औचित्य नहीं है।

सरकार, आम गरीब जनता को बेरोजगारी के मुंह में जबरन धकेल कर ईस तरह से देश को टोक्यो, लंडन बनाने का सपना साकार नही हो पाएगा । पहले देश में नौकरी व रोजगार के अवसर को प्रमुखता व बहुतायत से बहाल करे ताकी देश के जनता की बदहाली उपर उठ सके । उसके बाद नीजि रोजगार कर रहे रेहरी पटरी वालों को चिन्हित कर  स्थान सुनिश्चित कर उन्हें स्थानांतरित किया जाय ।
 



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