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"बढ़ाई जाएगी भारतीय रेल की रफ़्तार" और विभिन्न स्टेशन LED से होगा चकाचौंध।

"बढ़ाई जाएगी भारतीय रेल की रफ़्तार" और विभिन्न स्टेशन LED से होगा चकाचौंध।

By : Binod Jha
Jan 07, 2019
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नई दिल्ली:-  भारतीय रेलवे ने विभिन्न स्टेशनों पर रोशनी के स्तर में सुधार करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। रोशनी के स्तर में सुधार के लिए समय-समय पर विभिन्न योजनाएं जारी की गई है। इस संबंध में लिया गया अंतिम मुख्य निर्णय, सभी रेलवे स्टेशनों के बल्बों को 100 प्रतिशत एलईडी लाईट से तब्दील करना था। 

रेल मंत्री के निर्देश के अनुसार, भारतीय रेलवे ने 30.03.2018 को, लक्षित तिथि से एक दिन पहले, स्टेशनों पर 100 प्रतिशत एलईडी लाइट की व्यवस्था शुरू कर दिया है। इससे रोशनी के स्तर में बहुत सुधार हुआ है।  यह कार्य रोशनी में सुधार की परियोजना के पहले चरण के रूप में किया गया है, जिसमें मौजूदा रोशनी के वर्तमान स्थिति को बदलकर एक-एक करके एलईडी रोशनी से बदलले की मंजूरा प्रदान किया गया।

पीएटी: भारतीय रेलवे, उच्च ऊर्जा दक्षता प्राप्त करने की दिशा में लगातार अपने रास्ते पर चल रही है और सरकार द्वारा इसके लिए निर्धारित प्रदर्शन और व्यापार (पैट) चक्र- II  के लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया जाएगा और अगले चक्र में अधिक से अधिक ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (ईएससीईआरडीएस) की  प्राप्ति के माध्यम से अपने लाभ को अधिकतम करने का प्रयास किया जाएगा। रेलवे अपनी संकर्षण ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए बिजली पैदा करने के लिए पटरियों और अन्य भूमि खंड़ों के साथ रेलवे की खाली भूमि पर सौर पैनल स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रहा है। इस प्रकार का प्रयोग दुनिया में पहली बार किया जाएगा।
 

"बढ़ाई जाएगी भारतीय रेल की रफ़्तार" और विभिन्न स्टेशन LED से होगा चकाचौंध।

 मिशन रफ्तार - स्वर्ण चतुर्भुज (जीक्यू), कोणीय रेखाओं के साथ लगभग 58 प्रतिशत माल ढुलाई और 52 प्रतिशत कोचिंग ट्रैफ़िक को उठा रहा है, जिसकी शुरुआत पूरे नेटवर्क की केवल 16 प्रतिशत (~ 10000 किमी) हिस्सेदारी के साथ की गई है। गतिशीलता में आनेवाले प्रमुख रूकावटों की पहचान की गई है ~ 70 प्रतिशत मार्गों की अनुभागीय गति 130 किमी से कम है। 2736 लेवल क्रॉसिंग, प्रत्येक 3-4 किमी पर एक एलसी की औसत से। 730 स्थानों पर गति अवरोधक (प्रत्येक ~ 15-20 किमी पर औसत गति अवरोधक)। ~ 10 प्रतिशत (~ 900) मोड़, 30 किमी/घंटा से कम की गति वाला। मौजूदा बाधाओं को दूर करने के लिए व्यवस्थित तरीके से एक रोड मैप विकसित किया गया है। भारतीय रेलवे के सभी 28 मानवरहित लेवल क्रॉसिंगों को हटा दिया गया है। रोलिंग स्टॉक की गति क्षमता और निश्चित बुनियादी ढांचे के बीच असंतुलन के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक स्पीड पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार की गई है। 160 किमी प्रति घंटे की गति के लिए 10,000 किमी स्वर्णिम चतुर्भुज और विकर्णों को और 130 किमी प्रति घंटे की गति के लिए शेष मार्गों को अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के कुछ महत्वपूर्ण तत्व निम्नलिखित हैं:

लोको हाउल्ड कम्यूटर ट्रेनों का मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट्स (एमईएमयू ट्रेन) के साथ प्रतिस्थापन: एमईएमयू ट्रेनों में लोको हाउल्ड कम्यूटर ट्रेनों की तुलना में 20 किमी प्रति घंटे की औसत गति में वृद्धि की क्षमता होती है। गाजियाबाद- इलाहाबाद - मुगलसराय व्यस्त मार्ग पर एमईएमयू का प्रतिस्थापन करके उसे पारंपरिक ट्रेनों से मुक्त किया गया है। छह मार्गों पर एमईएमयू ट्रेनों को लोको हाउल्ड कम्यूटर ट्रेनों के स्थान पर लाने के लिए, कुल 1048 एमईएमयू कोच और 136 डीईएमयू कोच की आवश्यकता है। भारतीय रेलवे ने इस योजना के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए अगले तीन वर्षों (लगभग तीन गुना मौजूदा स्तर) में एमईएमयू रैक के उत्पादन को 1232 कोचों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। भारतीय रेलवे में एमईएमयू / डीईएमयू सेवाओं को कुल 124 जोड़ी यात्री सेवाओं को बदल दिया गया है। इन सेवाओं से यात्रा के समय में 5-20 मिनट की कमी लायी गई है। दिल्ली- मुंबई, दिल्ली- हावड़ा और मुंबई- चेन्नई को 2018-19 में पूरा कर लिया जाएगा। सभी मार्गों को वर्ष 2021 तक पारंपरिक कम्यूटर ट्रेनों से मुक्त कर दिया जाएगा।



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