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एक लाचार माँ की दर्द,बहु की हेकड़ी

एक लाचार माँ की दर्द,बहु की हेकड़ी

By : Binod Jha
Oct 01, 2019
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 दिल्ली: -  यह किसी सिनेमा अथवा किसी धरावाहिक की कहानी नहीं बल्कि यथार्थ से मैं  आपका परिचय करा रहा हूँ। आज हमारे समाज में कैसी कैसी विकृतियां पनप रही हैं किस मानसिकता का परिचय देते हैं परिवार की बहु,बेटे,बेटियां। आज एक ऐसी ही बहु के कृत्य को आपके सामने हम उजागर करने जा रहे हैं। मामला दिल्ली स्थित त्रिलोकपुरी के ब्लॉक नंबर ३४ की रहनेवाली बिलकिस नाम की महिला,जो की अपने पति नवाब,एवं बेटे सरफराज के साथ रहती थी। सरफराज दिल्ली के ही एम सी डी स्कुल में शिक्षक के पद पर कार्यरत था। सरफराज की शादी अपने ही समाज में हर तरह से उनके रीती रिवाज के तहत त्रिलोकपुरी के ही ब्लॉक नंबर १५ में रहने वाली जरीना की बेटी रुखसाना के साथ २७/०५/२००७ को करा दी गई। सरफराज की माँ बिलकिस ने ये तमाब बातें कहते हुए फफक कर रो पड़ी, और बताई की विवाहोपरांत १०-१५ दिन तक सब कुछ सही चलता रहा। बहु रुखसाना बेहद संजीदगी और अपने आव-भाव से सभी पारिवारिक सदस्यों से खास बात निकलवाने में माहिर थी मगर थी बेहद शातिर दिमाग की। एक-दिन रुखसाना ने अपने पति सरफराज से स्कुल में शिक्षिका के पद पर बहाल करने की पेशकश की,और तमाम जद्दोजहद के बाद हरसंभव प्रयास कर सरफराज ने रुखसाना को शिक्षिका के पद पर बहाल करवा भी दिया ।

 इस तरह से रुखसाना भी शिक्षिका के पद की गरिमा को सम्हालते हुए काम करने लगी। वहीँ जैसे-जैसे समय गुजरता गया बहु रुखसाना को परिवार की सभी जानकारियां होती गई। एक दिन जब रुखसाना को यह पता चला की जिस घर में वो रह रही थी वो उनके सास के नाम से पंजीकृत है। तब से रुखसाना अंदर ही अंदर बेहद ही क्रूर व्यवहार अपने पति व सास-ससुर के साथ करने लगी। यहां तक के अपनी पति से भी कह बैठी की ये घर मेरे नाम करवा दीजिये मगर पति सरफराज ने सिरे से खारिज करते हुए साफ़ मना कर दिया,की मैं ऐसा नहीं कर सकता। तब से वह अपने पति को भी प्रताड़ित करना शुरू कर दी, और लगभग आये दिन पति-पत्नी के बीच नोंक-झोंक होता रहता था। वहीँ बिलकिस रुखसाना की सास अपने पति नवाब के साथ अपनी दुनिया में शांतिप्रियता से अपने बहु की क्रिया-कलाप से अनजान खुश रहती थी। यह सोचकर की सभी पति-पत्नियों के बीच तकरार तो होता है। मगर वहीँ रुखसाना बेहद खौफनाक साजिस को अंजाम देने के फिराक में लगी रहती थी । यहां तक की अपने सास-ससुर के खिलाफ  झूठी प्रताड़ना का आरोप लगाकर मुकद्दमा भी दर्ज करवा चुकी थी। साथ ही अपने माँ-बाप एवं भाइयों से अपने पति को धमकाने के लिए फोन कॉल भी करवाती रहती थी । 

एक लाचार माँ की दर्द,बहु की हेकड़ी

बिलकुल स्पष्ट शब्दों में धमकाने के अंदाज में बहु रुखसाना स्वयं यह भी कहती रही की घर मेरे नाम कर दो बरना परिणाम बहुत ही बुरा होगा।  और यह सिलसिला वर्ष २०१२ तक चलता रहा। जब इन तमाम बातों की जानकारी ६ जून २०१४ में बिलकिस को हुई तो बिलकिस क्षुब्ध रह गई और अपनी आप-व्यथा सुनाने पहुँच गई आई0टी0ओ0 स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय। और अपनी पक्ष रखते हुए बहु की तमाम उत्पीड़न गाथा एवं बहु की क्रूरतापूर्ण कार्यशैली की शिकायतनामा प्रार्थना पत्र कमिश्नर को दे डाली। और उक्त प्रार्थना पत्र दिनांक १७/०६/२०१४ में दिल्ली पुलिस कमिश्नर से  बहु की उत्पीड़न से बचाने की गुहार प्रार्थना पत्र के जरिये की गई। प्रार्थना पत्र में की गई एक सीनियर सिटीजन की फ़रियाद को मयूर विहार स्थित थाने के एस0एच0ओ0, ए0सी0पी0 कल्याणपुरी, डी0सी0पी0 मंडावली एवं महिला आयोग दिल्ली तक को भी दी गई। मगर तब भी प्रशासनिक अधिकारियों की कुम्भकर्णी नींद नहीं खुली। वहीँ सरफराज किसी भी अधिकारियों की प्रतिकुलात्मक जवाब की अनदेखी एवं निष्क्रियता को देख अपनी पत्नी को तलाक देना ही एकमात्र रास्ता अख्तियार किया। और एक दिन अंत में  अपनी पत्नी के हाव-भाव व माता पिता के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार से तंग आकर सरफराज ने अपनी पत्नी रुखसाना को दिनांक १ सितम्बर वर्ष २०१४ को ४ गवाह के समक्ष निकाह में मेहर ३२.५ चांदी एवं  नकदी १६/०८/वर्ष २०१६ में तलाकनामा देकर अपने सारे पारिवारिक सम्बन्ध को ख़त्म करते हुए वैवाहिक जीवन से मुक्त कर दिया।

मगर बावजूद तलाक के रुखसाना का तेवर कम होने के वजाय और दिनानुदिन बढ़ता गया लगातार सरफराज पर दबाव बनाती रही यह सिलसिला वर्ष २०१८ तक चलता रहा। अंत में रुखसाना ने वृहद खौफनाक साजिश के तहत सरफराज के मौत को अंजाम देने के लिए दिनांक ०२/०९/२०१९ को तरके सुबह ८ बजे ही सरफराज के घर गई। सरफराज उस वक़्त अपने स्कुल जाने की तैयारी में जुटा हुआ था। सरफराज की माँ कि मानें तो सरफराज अपने बैंक खाते में नकदी ३,५०,००० रुपया जमां कराने के लिए अपना आधार कार्ड,पैन कार्ड,बैंक की पासबुक एवं २ मोबाइल अपने बैग में सम्हाल कर रख चुका था। ऐन वक्त पर रुखसाना ने किसी तरह से बहला फुसलाकर सरफराज को अपने घर पर ले जाने के लिए मना लिया। और दिल्ली के मयूर विहार फेस २ ब्लॉक डी0 फ्लैट नंबर ४७ डी में अपने घर ले गई । जहां रुखसाना के भाई शहजाद, इरशाद समेत उसकी माँ जरीना भी मौजूद थी। सबने मिलकर सरफराज को किसी खाद्यपदार्थ में जहर मिलाकर खिला दिया । और उसके बाद मारा-पीटा अंत में उसके गले में फांसी के फंदे लगाकर टांग दिया गया। मौत होने की पुष्टि के तुरंत बाद उसे नीचे उतारकर मेरे जानकार शानू जो की कुंडली में रहते हैं उनको ९:५१ पर कॉल किया गया। इन तमाम बातों को कहते हुए एक वृद्ध माँ ने अपने आंशुओं की धार को रोकते हुए भी नहीं रोक पा रही थी। वो माँ, जिसकी कोख आज सूनी पड़ी है, औलाद होते हुए बेऔलाद है, बहु होते हुए बगैर बहु की है। आखिर क्यों ? कसूरवार कौन है ? क्या प्रशासनिक अधिकारी ? महिला आयोग ? या बहु ? समय बीतता जाता है,मगर सूनी कोख का जख्म सदैव अंदर ही अंदर एक रोग की तरह माँ-बाप को बार-बार तड़पने पर मजबूर करता है। 

अतः समय रहते किसी भी अधिकारियों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा को समझते हुए इसपर तत्परता दिखाई होती तो, आज एक माँ बिलकिस को उनके एकलौते बेटे के मौत की जख्म और बेटे की जुदाई के गम को टाला जा सकता था। आज भी वो माँ न्याय पाने की आस में एकटक लगाईं बैठी है की शायद मेरे बेटे को इन्साफ मिले, कास एक माँ के दर्द समझते ये पदासीन अधिकारी।



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