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सच से दूर-दूर तक क़ोई सरोकार नहीं दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की

सच से दूर-दूर तक क़ोई सरोकार नहीं दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की

By : संवाददाता: बिनोद कुमार झा
Jun 20, 2018
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नई दिल्ली: कहानी आम आदमी पार्टी के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहल्ला क्लीनिक की, जिसकी बड़ाई करती आम आदमी पार्टी कभी नहीं थकती है। कहीं मोहल्ला क्लीनिक के अंदर घोड़े बंधे हुए हैं तो कहीं मोहल्ला क्लीनिक के पोर्टा केबिन को स्मैकियों और चोर उच्चकों ने अपना अड्डा बनाया है। दूर से देखने पर महारानी बाग का मोहल्ला क्लीनिक निराले अंदाज में है,दरवाजे पर ताला भी लगा हुआ है, लेकिन खिड़की टूटी है।  जब हमने टूटी ख़िड़की से झांक कर अंदर देखा तो हक़ीकत बिलकुल अलग निकली।  पूरा मोहल्ला क्लीनिक अंदर से खंडहर में तब्दील हो चुका है अंदर पूरी छत गिरी पड़ी है। अंदर स्मैकिये मोहल्ला क्लीनिक को अपना अड्डा बनाए हुए हैं। जब उसने संवाददाता की टीम को देखा तो खिड़की से कूदकर भाग गया। बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, अंदर किसी का ओरिजनल आधार और डेबिट कार्ड पड़ा हुआ था। इसे देखने के बाद साफ पता चलता है कि चोर यहां चोरी के बाद अपनी-अपनी भागीदारी लेते हैं और पर्स से पैसे निकालने के बाद बाक़ी सामान यहां फ़ेंक कर भाग जाते हैं। 
 

सच से दूर-दूर तक क़ोई सरोकार नहीं दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की

मोहल्ला क्लीनिक में मरीजों की जगह मवेशी के चारे रखे जा रहे हैं। 

महारानी बाग का मोहल्ला क्लीनिक एक साल पहले बना था। यहां शुरुआत में कुछ दिन डॉक्टर और मरीज़ तो आए, लेकिन एक बार ऐसी चोरी हुई कि तब से यहां न डॉक्टर हैं न मरीज़. दूसरी तरफ, कर्दमपुरी का मोहल्ला क्लीनिक एक साल पहले बनकर तैयार हो गया था, लेकिन आज तक उद्घाटन नहीं हुआ,नतीजतन जहां इंसान का इलाज होना चाहिए था वहां आज घोड़े व गधे आराम फ़र्माते हैं। अंदर उनका चारा पड़ा हुआ है और उनकी बुग्गी भी. बगल में बह रहे नाले की ऐसी दुर्गंध है कि खड़ा होना मुश्किल है। हम और भी कई जगहों पर पहुंचे जहां हालात कमोबेश यही हैं। आज़ादपुर मोहल्ला क्लीनिक के बाहर भी रेहड़ी पार्क हैं और आसपास कबाड़ का ढेर लगा हुआ है। लोग बताते हैं कि ये सिर्फ़ हफ़्ते में एक दो बार ही ख़ुलती है जबकि नियम के मुताबिक सोमवार से शनिवार सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक खुलनी चाहिए,गोकुलपुरी का भी मोहल्ला क्लीनिक कई महीनों से बंद पड़ा है।  लोग बताते हैं कि यहां दिनभर मरीज़ आते हैं, लेकिन बंद ताला देख कर लौट जाते हैं। 

गोकुलपुरी में ही रहने वाले मुकेश बताते हैं कि लोग यहां अपना इलाज कराने आते हैं पर ताला बंद देख वापस लौट जाते हैं। दिल्ली सरकार का वादा था कि एक साल के अंदर 1000 मोहल्ला क्लीनिक बनाएंगे, लेकिन तीन साल में सिर्फ़ लगभग 170 ही मोहल्ला क्लीनिक बन पाए हैं। जब हमने ये सवाल दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से पूछा तो उन्होंने ठीकरा अधिकारियों पर फ़ोड़ दिया। मनीष सिसोदिया ने कहा कि अधिकारियों से मीटिंग न हो पाने के कारण डॉक्टरों की बहाली नहीं हो पा रही है। जिस वजह मोहल्ला क्लीनिक खाली पड़े हुए हैं और अधिकारी सिर्फ़ एलजी की ही सुनते हैं । हालांकि जब स्वास्थ्य विभाग सीधे दिल्ली सरकार के अधीन है तो हर समस्या के लिए अधिकारियों को दोष देना कितना सही है ये आप स्वयं सोच सकते हैं। 



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