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दिल्ली के बुराड़ी में ११ मौत का राज अभी बांकी है

दिल्ली के बुराड़ी में ११ मौत का राज अभी बांकी है

By : संवाददाता: बिनोद कुमार झा
Jul 03, 2018
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दिल्ली:  दिल्ली के बुराड़ी में ललित ने रजिस्‍टर के कई पन्‍नों पर लिखा है। लेकिन अंतिम लाइन में इस प्रकार लिखा था कि अंतिम समय में आखिरी इच्छा की पूर्ति के वक्त आसमान हिलेगा, धरती कांपेगी, उस वक्‍त तुम घबराना मत, मंत्रों का जाप बढ़ा देना और मैं आकर तुम्हें उतार लूंगा, औरों को भी उतारने में मदद करूंगा, 
ललित ने अपने परिवार के सदस्‍यों से कहा था कि उसे अपने स्‍वर्गीय पिता से संदेश मिला है। इसका मतलब यह है कि ललित और उसके परिवार के लोगों को विश्‍वास था कि एक बार वो फांसी के फंदे से लटक जाएंगे तो उनके पिता अर्थात ईश्वर उनको बचा लेगा। परिवार बहुत अंधविश्वासी था और मानता था कि अगली कड़ी की कायमत उनके ही इर्द-गिर्द है। 

दिल्ली के बुराड़ी में ११ मौत का राज अभी बांकी है

परिवार और रिश्‍तेदारों से बात करने वाले पुलिस अधिकारी ने बताया कि ललित कई सालों से मौन था। उन्‍होंने बताया कि वह नोटबुक में सब कुछ लिखता था। इतना ही नहीं जो लोग उसकी दुकान में खरीदारी करने के लिए आते थे उनके साथ वह नोटबुक पर लिखकर बात करता था। इस वारदात से कुछ दिन पहले ललित ने बोलना शुरू किया था। उसने दावा किया था कि उसके पिता सपने में आकर उसके साथ बात करते हैं। रजिस्टर के नोट में लिखा है कि सब लोग अपने-अपने हाथ खुद बांधेंगे और जब क्रिया हो जाये तब सभी एक दूसरे के हाथ खोलने में मदद करेंगे। इससे ये लगता है कि परिवार के लोगों को मौत का अंदाज़ा नहीं था वो इसे एक खेल या एक ऐसे विश्वास के परिचायक थे जो सतित्व में है ही नहीं। वह इस तरह आत्मविश्वास से परिपूर्ण थे, की उन्हें लग रहा था वो इस तरह के कुकृत्य कर ज़िंदा बच जाएंगे।  

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अब तक कि खुलासे से ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें किसी तांत्रिक व् तंत्र विद्या का हाथ नहीं है। हालांकि अब सभी मृतकों के मोबाइल कॉल्स को खंगाला जा रहा हैं। घर का दरवाजे जिस तरह से खुले थे वो शक जरूर पैदा करते है कि कोई तांत्रिक आया और निकल गया हो, क्योंकि सुसाइड दरवाजा बंद करके ही होते हैं, लेकिन कोई तांत्रिक इतने लोगों को क्यों मौत के मुंह में धकेलेगा उसका क्या मकसद हो सकता है। वैसे अभी तक के जांच प्रक्रिया में किसी बाहरी आगंतुक के कोई साक्ष्य नहीं मिले है।  
हालांकि 11 मौत के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है, जिसमें कहा गया है कि सभी 11 लोगों की मौत फांसी के फंदे से हुई है, जबकि इससे पहले कहा जा रहा था कि एक बुज़ुर्ग महिला को गला दबाकर मारा गया है। वहीं भाटिया परिवार के करीबी और रिश्तेदार इन तथ्यों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। की इन लोगों ने आत्महत्या की होगी।  

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घर के जिस जाल पर परिवार के दस लोगों ने फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या की थी। उस जाल के नीचे कई कपड़े और स्टूल भी पाए गए हैं। पुलिसकर्मियों की मानें तो इस जाल तक पहुंचने के लिए ग्राउंड फ़्लोर से २८ सीढ़ियां हैं। इसके अलावा इस घटना के मास्टरमाइंड के तौर पर पुलिस ललित पर आशंका जाता रही है, उसकी सीसीटीवी में कुछ तस्वीरें भी कैद हुई हैं जिनमें वो घर के पास ही एक मोबाइल शॉप पर कुछ खरीद रहा है। मृतकों की पहचान नारायण देवी (७७) उनकी बेटी प्रतिभा (५७)और दो बेटे भावनेश (५०) और ललित भाटिया (४५) के रूप में हुई है। भावनेश की पत्नी सविता (४८) और उनके तीन बच्चे मीनू (२३), निधि (२५) और ध्रुव (१५), ललित भाटिया की पत्नी टीना (४२) और उनका १५ वर्ष का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका (३३) प्रियंका की पिछले महीने ही सगाई हुई थी और इस साल के अंत तक उसकी शादी होनी थी।



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